इतनी शक्ति हमें दे न दाता
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना...

हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है
सहमा-सहमा-सा हर आदमी है
पाप का बोझ बढ़ता ही जाये
जाने कैसे ये धरती थमी है
बोझ ममता का तू ये उठा ले
तेरी रचना क ये अन्त हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे 
भूलकर भी कोई भूल हो ना... 

दूर अज्ञान के हो अन्धेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचके रहें हम
जितनी भी दे, भली ज़िन्दगी दे
बैर हो ना किसीका किसीसे
भावना मन में बदले की हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे 
भूलकर भी कोई भूल हो ना...
हम न सोचें हमें क्या मिला है

इतनी शक्ति हमें दे ना दाता,
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना...